कंप्यूटर-computer क्या है? कंप्यूटर कि जानकारी - jankari 24

कंप्यूटर-computer क्या है? कंप्यूटर कि जानकारी

परिचय

यूं तो कंप्यूटर-computer को शब्दों में परिभाषित करना कोई आसान काम नहीं है  क्योंकि जिन्होंने कंप्यूटर का आविष्कार किया था वह भी नहीं सोचे होंगे कि यह क्या क्या कर सकता है और क्या नहीं –

वैसे कंप्यूटर के लिए नहीं जैसे शब्दों का उपयोग करना बिल्कुल भी सही नहीं होगा | आज आप सभी यह जानते ही हैं विभिन्न डिवाइसेज के रूप में जिन्हें आप कंप्यूटर कह सकते हैं |

इस लेख में हम हम जानेंगे कि कंप्यूटर कब और क्यों अस्तित्व में आया |कंप्यूटर के इतिहास से हमें समझने का प्रयास करेंगे कि कंप्यूटर काम कैसे करता है

और यह कितने प्रकार का होता है और आप जानेंगे कि कंप्यूटर सिर्फ एक डिवाइस नहीं बल्कि  बहुत सारे अलग-अलग parts को एक साथ जोड़ने से कंप्यूटर बनता है और उन  parts के बारे में हम संक्षेप में चर्चा करेंगे |

कंप्यूटर किस की सहायता से सिग्नल को पास करता है तथा इसके फायदे एवं हमारे जीवन में कंप्यूटर का क्या महत्व है हम इन सभी विषयों पर संक्षेप में चर्चा करेंगे और यह जानकारी मेरे पर्सनल अनुभव और वर्तमान में मौजूद कंप्यूटर की स्थिति को ध्यान में रखकर यह जानकारी आपसे साझा कर रहा हूं |

इस लेख को पढ़कर आपकी जानकारी में जरूर वृद्धि होगा ऐसा मुझे विश्वास है|क्योंकि मैं चाहता हूं कि रीडर्स को कंप्लीट जानकारी मिले हमारे इस वेबसाइट का मकसद ही यही है कि जानकारी को कंप्लीट करा जाए |

क्योंकि आधी अधूरी जानकारी सही नहीं होती है एक बार मेरे लेख को पढ़ लेने के बाद आपको किसी दूसरे लेख में जाने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए –ऐसा मेरा सोचना है क्योंकि समय बहुत कीमती है ओर उसे हमे संभाल कर खर्च करना चाहिए |

Table Of Content

कंप्यूटर क्या है ?What is Computer

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कंप्यूटर-computer एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो यूजर के निर्देशानुसार कार्य को संपादित करता है चाहे वह कार्य कुछ भी हो|

मुझे नहीं लगता कि 21वी सदी में हमें यह किसी को समझाना पड़ेगा कि कंप्यूटर क्या है और कंप्यूटर क्या कार्य कर सकता है परंतु फिर भी हमें यह जरूर जानना चाहिए कि कंप्यूटर का आविष्कार कब क्यों और किसने किया था |

इसके लिए हमें इतिहास के कुछ पन्ने पलटने होंगे चार्ल्स बैबेज से पहले वास्तव में कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर नहीं था जिसे आज आप जानते हैं |कंप्यूटर एक नौकरी का शीर्षक था और उसे एक ऐसे व्यक्ति द्वारा परिभाषित किया गया था जो अनिवार्य रूप से पूरे दिन संख्याओं की गणना करता था |

कंप्यूटर-computer का इतिहास

कंप्यूटर-computer के पहले उंगलियों के द्वारा पत्राचार करने के लिए  हजारों वर्षों से गणना उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है अबेकस का प्रयोग सर्वप्रथम अंकगणितीय कार्यों के लिए किया जाता था

रोमन अबेकस का विकास बेबीलोनिया में 2400 ईसा पूर्व में प्रयुक्त उपकरणों से प्रारंभ हुआ था तब से कई अन्य प्रकार के rakeningबोर्ड या टेबल का आविष्कार किया जा चुका है|

एक मध्ययुगीन यूरोपीय मतगणना ग्रह में एक चेकर वाला कपड़ा एक मेज पर रखा जाता था और कुछ नियमों के अनुसार धन की गणना में सहायता के रूप में मारकरो को उसके चारों ओर घुमाया जाता था |

Derek j d solla price  के अनुसार anti-kai-thera तंत्र को सबसे पुराना यांत्रिक एनालॉग कंप्यूटर माना जाता है इसे खगोलीय स्थितियों की गणना करने के लिए डिजाइन किया गया था |

गणना और माप के लिए कई यांत्रिक उपकरणों का निर्माण एवं खगोलीय और नेविगेशन उपयोग के लिए भी किया गया था|

चार्ल्सबैबेज ने 19वीं शताब्दी की शुरुआत में पहले यांत्रिक कंप्यूटर-computer की अवधारणा और अविष्कार किया ,

अपने क्रांतिकारी अंतर इंजन पर काम करने के बाद 1833 में 9 वाहन गणना में सहायता के लिए कंप्यूटर का डिजाइन किया गया था |उन्होंने महसूस किया की एक अधिक सामान्य डिजाइन ,एक विश्लेषणात्मक इंजन संभव था |

प्रोग्राम और डाटा का इनपुट मशीन को पंच कार्ड के माध्यम से प्रदान किया जाना था उस समय यांत्रिक करघों जैसे कि जैक्वार्ड लूम को निर्देशित करने के लिए एक विधि का उपयोग किया जाता था |

output के लिए मशीन में एक प्रिंटर ,एक कर्व प्लॉटर और एक घंटी होगी |मशीन बाद में पढ़ने के लिए कार्ड पर नंबर पंच करने में भी सक्षम होता |

इंजन में 1 अंक गणितीय तर्क इकाई ,कंडीशनल ब्रांचिंग और लूप के रूप में नियंत्रण प्रवाह और एकीकृत मेमोरी को शामिल किया जिससे यह एक सामान्य उद्देश्य वाले कंप्यूटर के लिए पहला डिजाइन बन गया है जिसे आधुनिक शब्दों में टयूरिंग पूर्ण के रूप में वर्णित किया जा सकता है |

मशीन अपने समय से लगभग एक सदी आगे थी उनकी मशीन के सभी पुर्जे हाथ से बनाने पड़ते थे हजारों parts वाले उपकरण के लिए यह एक बड़ी समस्या थी चार्ल्स बैबेज एक अंग्रेजी मैकेनिकल इंजीनियर और पॉलीमर थे इन्हीं कंप्यूटर का पिता भी कहा जाता है |

कंप्यूटर की आवश्यकता क्यों ?

18 वीं सदी में मुद्रित गणितीय टेबल या लॉग जो अनिवार्य रूप से गणना के परिणाम दिखाने वाले संख्याओं की सूची बहुत लंबी थी जिसे पहले उल्लेख किए गए मानव द्वारा पूरा किया गया था जिसे वे घंटे 10 घंटे हाथों द्वारा गणना कर उन्हें पुस्तकों में रिकॉर्ड कर रहे थे |

चार्ल्स बैबेज को जब लॉग से सामना करना पड़ा तो उन्हें पता चला कि वह तो त्रुटियों से भरा हुआ है जिसे मानव कंप्यूटर-computer द्वारा किया गया है और इस लेखन एवं प्रतिलेखन में काफी त्रुटिया होती थी जिसे अक्सर दूसरे सेट में स्थानांतरित कर दिया जाता था |

इस प्रकार एक बहुत ही जटिल गड़बड़ी पैदा हो जाती थी  को जब यह समझ आया कि अब कुशल कंप्यूटर-computer और लोगों के काम को मशीनों द्वारा पूरी दक्षता दक्षता से किया जा सकता है जो न केवल विश्वसनीयता बढ़ाएगा और गति एवं मानव 20 को समाप्त भी करेगा |

चार्ल्स बैबेज ने इन सभी विचारों के साथ संभवत पूरी प्रक्रिया के दौरान काफी परीक्षण और त्रुटि के बाद 1822 में भेजने इन संगठनों के लिए एक माध्यम बनाया जिसे वे अंतर इंजन या डिफरेंस इंजन भी कहते थे |

डिफरेंस इंजन क्या है या अंतर इंजन किसे कहते हैं ?

डिफरेंस इंजन को चार्ल्स बेबेज का पहला कंप्यूटर-computer के रूप में जाना जाता है बेबेज का अंतर इंजन स्वचालित ढंग से मानो वैल्यूज की तरह श्रृंखला को गणना करने के लिए डिजाइन किया गया था |

यह एक केलकुलेटर की तरह था लेकिन काफी बड़ा था किस तरह बेबेज के विचारों को रूप मिला इस मशीन की कुछ लिमिटेशंस भी थी और धन के अभाव में यह डिफरेंस इंजन कभी पूरा नहीं हो सका|

1833 तक बेबेज अपने मशीनों और उनके डिजाइन की कार्य क्षमता में सुधार के विषय में सोचना शुरू कर दिया था 1833 में बैबेज ने अदा ब्रायन के साथ मिलकर आज के आधुनिक कंप्यूटर की नींव रख दी और उसे एनालिटिकल इंजन के रूप में उल्लेखित किया जिसमें डेटा पंच कार्ड की मदद से इंसर्ट करते थे |

कंप्यूटर की परिभाषा

कंप्यूटर-computer एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसे हम सिस्टम सॉफ्टवेयर के माध्यम से या प्रोग्राम के द्वारा रन करवाते हैं या उसे नियंत्रित  करते हैं कुछ इनपुट और आउटपुट डिवाइस की मदद से हम कंप्यूटर को ऑपरेट कर पाते हैं |

कंप्यूटर का फुल फॉर्म

कंप्यूटर-computer का एक कल्पनिक फुल फॉर्म हो सकता है

  • C – Commonly
  • O – Operated
  • M – Machine
  • P – Particularly
  • U – Used for
  • T – Technical and
  • ई – educational
  • R – Research

कंप्यूटर के आविष्कारक

कंप्यूटर-computer का जनक चार्ल्स बेबेज को माना जाता है

कंप्यूटर काम कैसे करता है ?

कंप्यूटर-computer के कार्य को हम मुख्यतः तीन भागों में बांट सकते है

 इनपुट :- इनपुट डाटा यह वह डाटा हो सकता है जिसे आप इनपुट उपकरण के माध्यम से कंप्यूटर में फीड करते हैं जैसे कीबोर्ड ,माउस ,स्कैनर |

प्रोसेसिंग  :-वह उपकरण जो आपके इनपुट डिवाइस की मदद से दिए गए इनपुट डाटा को प्रोसेस करता है जैसे प्रोसेसर |

आउटपुट   :- वे उपकरण जिसके माध्यम से आप अपने द्वारा दिए गए इनपुट डाटा का परिणाम देख पाते हैं जिसे हम आउटपुट डाटा कहते हैं और जिस डिवाइस के माध्यम से हम आउटपुट परिणाम को देखते हैं उसे हम आउटपुट डिवाइस कहते हैं जैसे मॉनिटर, प्रिंटर |

कंप्यूटर के मुख्य भाग

कंप्यूटर को मुख्यतः दो भागों में बांटा जा सकता है

a) हार्डवेयर  b) सॉफ्टवेयर

a) हार्डवेयर

कंप्यूटर-computer के सारे पार्ट जिन्हें हम अपने हाथों से छू सकते हैं उन्हें हार्डवेयर कहते हैं इसके अंतर्गत जो डिवाइस आते हैं जिसे हम मदरबोर्ड ,माइक्रो प्रोसेसर ,रैम , माउस ,हार्ड डिस्क ,जॉय स्टिक, लाइट पेन, ट्रैकबॉल ,स्केनर ,ग्राफिक टेबलेट ,माइक्रोफोन ,वेबकैम, प्रिंटर आदि के नाम से जानते हैं

b) सॉफ्टवेयर

सॉफ्टवेयर कंप्यूटर-computer का एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा कंप्यूटर के सारे ऑपरेशन को रन कराया जाता है यह तीन तरह के हो सकते हैं

सिस्टम सॉफ्टवेयर(window ,linux) , एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर(ms office), तीसरा है लैंग्वेज सॉफ्टवेयर या प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर(c++,java,pythone) |

मदरबोर्ड

जब आप कंप्यूटर-computer के कैबिनेट को ओपन करते हैं तो उसमें एक चौकोर पतली प्लेट जैसा और सभी उपकरणों से जुड़ा हुआ सर्किट बोर्ड होता है जिसे हम मदरबोर्ड कहते हैं|

इसे हम मेन सर्किट बोर्ड या लॉजिक बोर्ड के नाम से भी जानते हैं यह मदरबोर्ड बनता है इसमें लगने वाले कंपोनेंट के कारण जिसमें से कुछ के विषय में हम जानेंगे|

जैसे सीपीयू सॉकेट ,बैक पैनल एंड , इनपुट आउटपुट कनेक्शन slot ,PCI slot , hard disk connecting slot , primary memory slot ,CMOS battery socket bios etc.

कंप्यूटर मदरबोर्ड के प्रकार

  • A. T. Motherboard,
  • X. T. Motherboard
  • ATMs motherboard
  • micro A. T. X motherboard
  • flax A. T. X. motherboard,
  • l. p. x. motherboard,
  • b. t. x motherboard,
  • Pico btx motherboard, Mini ITX motherboard,
  • E. A. T. X motherboard,

सीपीयू

इसे सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट भी कहते हैं यह कंप्यूटर-computer का प्राइमरी कंपोनेंट है इसे कंप्यूटर का ब्रेन भी कहा जाता है |

क्योंकि जिस तरह हमारा दिमाग पूरे शरीर को कंट्रोल करता है उसी प्रकार हम यह कह सकते हैं कि सीपीयू भी कंप्यूटर को नियंत्रित करता है या यूजर के द्वारा दिए गए निर्देशों को पूरा करने का काम यह करता है इस कारण इसे प्रोसेसिंग कंपोनेंट या प्रोसेसिंग डिवाइस भी कहते हैं |

यह चौकोर शेप वाला चिप होता है जिसे मदरबोर्ड के सीपीयू सॉकेट में असेंबल किया जाता है जिसके ऊपर इसे ठंडा रखने के लिए हिट सिंक और फैन लगा होता है |

जिसे सीपीयू फैन कहते हैं क्योंकि यह प्रोसेसिंग कंपोनेंट है यूजर चाहे जो भी कार्य करें चाहे अर्थमैटिकल हो या लॉजिकल उन सभी डाटा को प्रोसेस करने का काम यह सीपीयू करता है |

कंप्यूटर जनरेशन के आधार पर सीपीयू

first generation cpu

vacuum tube :- वैक्यूम ट्यूब कंप्यूटर-computer CPU की पहली पीढ़ी थी और यह मेमोरी के लिए वैक्यूम ट्यूब और magnetic drum का उपयोग करता था या आकार मेंन काफी बड़ा होता था और काफी महंगा भी होता था |

second generation transistor CPU

यह  दूसरी पीढ़ी का सीपीयू था और वैक्यूम 2 को रिप्लेस कर दिया था टंगस्टन 1947 में बनाया गया था और 1950 आते-आते इसका यूज कंप्यूटर में शुरू कर दिया गया क्योंकि ट्रांजिस्टर भी काफी बड़ा था |

और इसे कंप्यूटर-computerके हिसाब से छोटा बनाया गया परंतु समस्या वही पहले जैसा ही बना रहा सिस्टम के हिट होने का |

3rd Generation Integrated circuit

सीपीयू ट्रांजिस्टर का एक समूह या एक साथ एक दूसरे से जुड़ा हुआ ट्रांजिस्टर का समूह था जिसे आई सी के रूप में जाना जाता था किसे वर्तमान सीपीयू का आधार भी कह सकते हैं |

इस आईसीसी सीपीयू को बनाने के लिए हजारों आईसी चिप और हजारों आईसी सर्किट की आवश्यकता होती थी  परंतु यह साइज में  छोटा और अच्छा होता था और इसकी क्षमता और दक्षता भी काफी अच्छी थी

4th generation microprocessor

चौथी पीढ़ी की स्थितियों को माइक्रोप्रोसेसर कहा जाता था और अभी तक उसे माइक्रो प्रोसेसर ही कहते हैं यह पहले दूसरे तीसरे पीढ़ी की तुलना में काफी छोटा होता है |

और इसके अंदर हजारों ट्रांजिस्टर आई सी के रूप में जुड़े होते हैं पहले के मुकाबले वर्तमान में माइक्रो प्रोसेसर का स्वरूप काफी बदल चुका है यह बहुत हद तक छोटा हो चुका है |

5th generation

artificial intelligence या कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर को सोचने और समझने की शक्ति प्रदान करने वाला यह सिस्टम होता है और लगातार इसका विकास हो रहा है इसे हम रोबोट के रूप में वर्तमान में देख सकते हैं और कुछ ऑटोमेटिक कार्स में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है |

कोर के आधार पर सीपीयू के प्रकार

single core CPU

इस तरह के सीपीयू में केवल एक कोर होता है इसमें हम एक बार में केवल एक ही (data) काम को कर सकते हैं यदि हम इसके साथ कई ऑपरेशन को करेंगे जैसे टाइपिंग करना और गाना सुनना यदि एक साथ दो या तीन ऑपरेशन स्टार्ट करने पर यह काफी स्लो हो जाता है इससे ज्यादा समय का लॉस होता है |

dual core CPU

डुएल कोर सी पी यू का मतलब प्रोसेसर के दो भाग या टू सेट ऑफ आईसी चिप या दो 4 या 2 रास्ता कह सकते हैं जहां पर एक बार में आना और जाना संभव हो जाता है यदि आप मल्टीटास्क करते हैं तो यह वह काम कम समय में कर देगा सिंगल कोर की अपेक्षा |

quad core CPU

dual-coreके समान ही  एक चिप होता है जिसमें चार स्वतंत्र इकाईया  होती है जिन्हें कोर काहा जाता है जो केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई (सीपीयू) के निर्देशों को पड़ता है और निष्पादित भी करता है|

जैसे डाटा जोड़ना और डाटा को स्थानांतरित  करना क्वॉड कोर प्रोसेसर एक मल्टिप्रोसेसर आर्किटेक्टरक है  जिसे तेज प्रोसेसिंग पावर प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है व्हाट कोर प्रोसेसर एक ही प्रोसेसर में दो डुएल कोर प्रोसेसर को एकीकृत करता है दो अलग-अलग दोहरे कोर प्रोसेसर , का उपयोग करके एक दूसरे के साथ सम्मान करते हैं |

Hexa core CPU

हेक्सा कोर 6 कोर वाला प्रोसेसर है क्योंकि इसके पूर्व भी ज्यादा है और इसमें dual-core की संख्या भी ज्यादा है इस वजह से इतने मल्टी टास्किंग करना बहुत आसान हो जाता है और यह काम को बहुत तेजी से कर सकता है |

Octa Core CPU

ऑक्टा कोर भी हेक्सा कोर के अनुसार इसी श्रेणी में आता है जो बहुत ही उच्च गति की माइक्रोप्रोसेसर हो सकती है वर्तमान में ज्यादातर कंप्यूटर में या मोबाइल फोन में  इस तरह के प्रोसेसर का उपयोग हो रहा है |

मेमोरी

कंप्यूटर-computer के प्रोसेसर को यूजर द्वारा दिए गए इनपुट डाटा या इंफॉर्मेशन को process करने के लिए और उन्हें सुरक्षित करने के लिए कुछ सहायक उपकरण की आवश्यकता होती है जो प्रोसेसर के इंस्ट्रक्शन को स्टोर कर सके और जरूरत पड़ने पर उसे रीकॉल भी कर सके ऐसे ही डिवाइस को हम मेमोरी कहते हैं

मेमोरी के प्रकार

1)प्राइमरी मेमोरी 2) सेकेंडरी मेमोरी

प्राइमरी मेमोरी है

रैम, रोम, कैश, मेमोरी और रजिस्टर

रैम

इसे Random Access memory के नाम से जाना जाता है इसे हम प्राइमरी मेमोरी भी कहते हैं यह कंप्यूटर-computer की प्राइमरी मेमोरी है |

यह मुख्य मेमोरी भी होती है क्योंकि यह मेमोरी जब कंप्यूटर को स्टार्ट करते हैं तो सबसे पहले एक्टिव होता है और डाटा प्रोसेस के लिए इंस्ट्रक्शन को पहले अपने पास स्टोर करता है ताकि सीपीयू को प्रोसेस करने के लिए डाटा उपलब्ध करा सके|

हम बिना प्राइमरी मेमोरी के या रैम के बिना कंप्यूटर को स्टार्ट नहीं कर सकते हैं  यह एक वोलेटाइल मेमोरी होती है इसका मतलब कि जब आपके कंप्यूटर सिस्टम की बिजली कट हो जाए तो इसके अंदर स्टोर सारे डेटा का लॉस हो जाता है |

यह मेमोरी काफी फास्ट हो सकते हैं सेकेंडरी मेमोरी की तुलना में प्राइमरी मेमोरी के स्टोरेज क्षमता  कम होता है यह दो प्रकार के हो सकते हैं |

रैम दो प्रकार के हो सकते हैं

a) S Ram b) D Ram

S Ram :- इसे स्थिर रैम माना जाता है इसे 6 ट्रांजिस्टर को सेट करके इसकी मेमोरी सेल को बनाया जाता है यह थोड़ा सा डाटा को स्टोर करके रख सकता है |

इसकी मेमोरी सेल एक प्रकार के फ्लिप फ्लॉप्स सर्किट होता है जिसे आमतौर पर fets का उपयोग करके कार्यान्वित किया जाता है इसका अर्थ यह है कि s ram का एक्सेस ना होने की स्थिति में बहुत कम बिजली खर्च होता है |

D Ram :- D ram capacitor पर आधारित है इसके capacitor चार्ज या डिस्चार्ज करने पर सेल में 1या 0 स्टोर हो सकता है हालांकि इस capacitor में चार्ज धीरे धीरे लिक हो जाता है और इसे समय-समय पर रिफ्रेश करना पड़ता है या रिफ्रेश करना चाहिए |

रोम

यह कंप्यूटर-computer का दूसरा प्राइमरी मेमोरी है जिसे हम रीड ओनली मेमोरी भी कहते हैं य‍ह एक नॉन वोलेटाइल मेमोरी होता है या परमानेंट मेमोरी भी कह सकते हैं |

पावर के कट होने पर भी इसे फर्क नहीं पड़ता इसका डाटा वैसे का वैसा ही बना रहता है इसमें डाटा लॉस नहीं होता इस मेमोरी को आप सिर्फ रीड कर सकते हैं उसमें कोई चेंज नहीं कर सकते|

रोम एक चिप में के रूप में मदरबोर्ड में लगा होता है जिसमें bios में फर्मवेयर सॉफ्टवेयर के रूप में इंस्टॉल होता है य‍ह कंपनी द्वारा कुछ परमानेंट info को कंप्यूटर में इंस्टॉल करने के लिए उपयोग किया जाता है |

रोम तीन प्रकार के हो सकते हैं

a) P rom b) EPRom c) EEPRom

P rom :- प्रोग्रामेबल रीड ओनली मेमोरी यह भी एक प्रकार की रीड ओनली मेमोरी है और इसका डाटा भी परमानेंट होता है इसे चेंज नहीं किया जा सकता है |

रोम और पी रोम में अंतर यह है रोम में data को निर्माण के दौरान स्टोर कर देते हैं जबकि पी रूम में निर्माण के बाद स्टोर करते हैं इसे वन टाइम प्रोग्रामेबल मेरी भी कहते हैं |

EPRom :- इरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ओनली मेमोरी जैसा कि नाम से पता चलता है कि इस मेमोरी में लोड प्रोग्राम को  इरेज़ किया जा सकता है और फिर राइट भी किया जा सकता है |

अब सवाल आता है कि यह होगा – कैसे तो इसके लिए eprom इरेज़र का यूज किया जाता है जिसके माध्यम से eprom में 30 से 40 मिनट तक उच्च पराबैंगनी किरणों के संपर्क में रखा जाता है |

EEPRom :- एक नॉन वोलेटाइल मेमोरी है जो कंप्यूटर-computer में स्मार्ट कार्ड रिमोट की ले सिस्टम में माइक्रोकंट्रोलर में और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में अपेक्षाकृत कम डाटा को स्टोर करने के लिए उपयोग किया जाता है |

इसके अंदर डाटा को हम 10000 बार यूज कर सकते हैं और प्रोग्राम कर सकते हैं वह भी कुछ मिली सेकंड में |

कैश मेमोरी

प्रोसेसर को तेजी से और लगातार काम करने की आवश्यकता होता है क्योंकि प्रोसेसर लगातार काम करता रहता है जिससे वह स्लो हो जाता है

और उसके पास स्पेस भी कम होता है कैश मेमोरी प्रोसेसर के सबसे नजदीक का मेमोरी है इस काम में सीपीयू सबसे पहले कैश मेमोरी को चेक करता है|

वहां डाटा इनफार्मेशन ना मिलने पर वह मेन मेमोरी को चेक करता है कैश मेमोरी यूजर द्वारा दिए गए इनपुट को स्टोर करता है माइक्रोप्रोसेसर के लिए |

कैश मेमोरी के प्रकार

L1 :- कैश मेमोरी प्रोसेसर के अंदर होता है यह सीपीयू के साथ-साथ सामान्य स्पीड पर काम करता है यह सीपीयू के प्रत्येक कोर में उसका अपना L-1 कैश मेमोरी होता है यह L2 ,L3 से फास्ट होता है |

L2 :- यह L 2 कैश मेमोरी है यह सीपीयू के बाहर या अंदर यह बगल में हो सकता है जब L1 में इंफॉर्मेशन सीपीयू के द्वारा मिस होता है तो उसी डाटा को L 2 में सर्च करता है यह L 1 से स्लो ओर L 3 से फास्ट होता है |

l3 :- यह कैश सीपीयू के बाहर यह सीपीयू के बगल में होता है क्योंकि यह सीपीयू से दूर होता है इस कारण एल्बम और L2 से स्लोवर होता है |

रजिस्टर resister

रजिस्टर को भी प्राइमरी मेमोरी की तरह उपयोग किया जाता है है यह उन सभी डाटा को स्टोर करता है जो यूजर द्वारा इनपुट किया जाता है और रैम के माध्यम से कंट्रोल यूनिट द्वारा प्रोसेस करने के बाद तब तक अपने पास रखता है जब तक आउटपुट डिवाइस को यह एक्सटर्नल मेमोरी को ना मिल जाए या टेंपरेरी होता है यह वोलेटाइल मेमोरी होता है |

रजिस्टर के प्रकार

  • M. A. R(Memory address register)
  • general purpose register
  • IR (instruction register)
  • C. C. R (Condition code register)
  • A. R (Accumulater )
  • input output register
  • input output buffer register
  • P. C. (program counter)
  • index register
  • Stack control register
  • memory buffer register
  • control register

सेकेंडरी मेमोरी क्या है ?

सेकेंडरी मेमोरी  यह वह मेमोरी है जहां पर हम प्रोसेस डाटा को स्टोर करते हैं यह लंबे समय तक डाटा को स्टोर करके रख सकता है इसकी कैपेसिटी टेराबाइट में हो सकता है |

इसे हम परमानेंट मेमोरी भी कह सकते हैं यह नॉन्वोलेटाइल वर्ग के अंतर्गत आते हैं और इसे सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस भी कहते हैं इसे कंप्यूटर की स्टोरेज क्षमता को बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है |

सेकेंडरी मेमोरी के प्रकार

  • Hard disk drive
  • Solid state drive
  • floppy disk drive
  • CD (compact disc)
  • DVD
  • Magnetic tape
  • optical disc
  • zip disket
  • USB flash drive
  • SD memory card

हार्ड ड्राइव

हमारे कंप्यूटर-computer में डाटा को स्टोर करने के लिए जो डिवाइस यूज करते हैं उसे ही हम हार्ड डिस्क कहते हैं इसे हम हार्ड डिस्क ,हार्ड डिस्क ड्राइव या  फिक्स ड्राइव के नाम से भी  जानते हैं. |

नाम चाहे जो भी हो परंतु काम सिर्फ एक डाटा को स्टोर करना |यह नॉन वोलेटाइल मेमोरी होता है इसकी स्टोरेज कैपेसिटी बहुत ज्यादा होती है इस कारण इसका स्पीड या डाटा ट्रांसफर कम होता है रेम की अपेक्षा.|

इसकी स्पीड को आरपीएम में मापते हैं 1 मिनट में प्लेट जितने चक्कर लगाता है उसे ही RPM कहते है सामान्यतः हार्ड डिस्क 5400 या 7208 rpmका आता है |

यह हार्ड डिस्क SSD हार्ड ड्राइव की अपेक्षा भारी होता है और स्पीड में भी ssd हार्ड ड्राइव से कम होता है गिरने पर इसका डाटा का लॉस हो जाता है प्लेट पर हल्का सा क्रेक होने पर भी डाटा लॉस होता है |

सर्वप्रथम आईबीएम ने 1956 में पेश किया था 1960 के दशक में डाटा स्टोर करने के लिए मुख्य स्टोरेज होता था सामान्य कंप्यूटर मे.|

हार्ड डिस्क के प्रकार

Pata :- parallel advanced technology attachment इसे आई डी (इंटीग्रेटेड ड्राइव इलेक्ट्रॉनिक) भी कहा जाता है यह 39 पिन वाला होता है पाटा हार्ड डिस्क कंप्यूटर से कनेक्ट करने के लिए ए टी ए इंटरफेस स्टैंडर्ड का यूज करता है|

इस इंटरफेस के साथ हम एक साथ दो हार्ड डिस्क कनेक्ट कर सकते हैं इसका डाटा ट्रांसफर रेट 133 mb/s होता है |

Sata :- serial advanced technology attachment वर्तमान समय में इस तरह के हार्ड डिस्क ड्राइव का यूज ज्यादातर डेस्कटॉप कंप्यूटर या लैपटॉप में होता है|

पाटा की अपेक्षा डाटा ट्रांसफर रेट अधिक होता है यह पतली साटा केबल के द्वारा कंप्यूटर से कनेक्ट होता है इसमें एक इंटरफेस में केवल एक हार्ड डिस्क को कनेक्ट कर सकते हैं इसका डाटा ट्रांसफर रेट 150 mbp/s सेकंड होता है |

Ssd :- solid state drive  में डाटा स्टोर और ट्रांसफर करने का मुख्य आधार नंद फ्लैश मेमोरी है जो अतिशीघ्र सिस्टम को बूट करने फाइल को लोड करने उस को स्टोर करने और ट्रांसफर करने का काम करता है |

Ssd बनाने के लिए हमें फ्लैश कंट्रोलर और नंद फ्लैश मेमोरी चिप की आवश्यकता होती है nand flash memory एक प्रकार की गैर वास्‍पशील भंडारण तकनीक है जिसमें डेटा को बनाए रखने के लिए पावर की आवश्यकता नहीं होती है |

SSD में कोई Moveble part नहीं होता है नॉर्मल हार्ड डिस्क की तरह – यह नॉर्मल हार्ड डिस्क की अपेक्षा महंगा होता है जिससे डाटा लॉस का खतरा कम होता है इसका डेटाएक्सेस rate काफी अच्छा होता है |

Scsi : – small computer system इंटरफ़ेस इसका उपयोग छोटे कंप्यूटर सिस्टम में किया जाता है यह 640 mb/s में डाटा ट्रांसफर कर सकता है scsi केबल से scsi हार्ड डिस्क ड्राइव को कनेक्ट किया जाता है इस केबल के सहारे 16 scsi हार्ड डिस्क को एक साथ कनेक्ट कर सकते हैं

Input device

निर्देशों एवं इंफॉर्मेशन को कंप्यूटर-computer में फीड करने के लिए हमें कुछ उपकरणों की आवश्यकता होता है जो किसी माध्यम के जरिए कंप्यूटर से जुड़ा होता है या उसे कंप्यूटर का हार्डवेयर या एक्सटर्नल पार्ट भी कह सकते हैं जो कंप्यूटर में डाटा फीड करने के लिए उपयोग करते हैं जिसे हम इनपुट डिवाइस कहते हैं |

इनपुट डिवाइस के प्रकार

  • कीबोर्ड
  • माउस
  • ट्रैकबॉल
  • स्कैनर
  • जॉय स्टिक
  • माइक्रोफोन
  • touch स्क्रीन
  • ग्राफिक टेबलेट ओ
  • एमआर रीडर
  • ओसीआर रीडर

आउटपुट डिवाइस

वर्तमान में बिना आउटपुट डिवाइस के आप कंप्यूटर-computer की कल्पना कर ही नहीं सकते |इनपुट डिवाइस के माध्यम से फीड किए गए डाटा या इंफॉर्मेशन  के परिणाम को देखने या पढ़ने के लिए हमें कुछ ऐसे डिवाइस की आवश्यकता होती है |

जिसे हम आउटपुट डिवाइस कहते हैं शुरुआती कंप्यूटर से लेकर अब तक आउटपुट डिवाइस का काफी विकास हो चुका है कार्य के अनुसार हम कुछ और को डिवाइस के बारे में जानेंगे जो बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है |

आउटपुट डिवाइस के प्रकार

मॉनिटर

मॉनिटर कंप्यूटर-computer का एक महत्वपूर्ण पार्ट है जिसे हम डिस्पले स्क्रीन, डिस्प्ले यूनिट, टर्मिनल ना जाने और किन किन नामों से जानते हैं मॉनिटर कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण पार्ट हो सकता है |

इसके बिना भी कंप्यूटर अधूरा है इसी के माध्यम से इनपुट फीड किए गए इंफॉर्मेशन को मॉनिटर के माध्यम से ही पढ़ ओर देख पाते हैं यह देखने में टीवी की तरह होता है इसका रेसोल्युशंस टीवी से अच्छा होता है |

मॉनिटर न हो तो कंप्यूटर में क्या चल रहा है यह पता  ही ना चले मॉनिटर के इंटरफ़ेस मॉनिटर को कंप्यूटर के साथ कनेक्ट करने के लिए हार्डवेयर  की आवश्यकता होती है पहले यह मदरबोर्ड से अलग होता था लेकिन यह मदर बोर्ड में इन बिल होकर आता है |

मॉनिटर के प्रकार

  • CRT monitor( cathode ray tube)
  • LCD monitor( liquid crystal display)
  • LED monitor( light emitting diode)
  • o l e d monitor( Organic light emitting diode)
Vga

(video grafic arrey) यह 15 pin का स्टैंडर्ड कनेक्टर होता है जो D shap का मेटल का बना होता है इसमे 3 row होता है प्रत्येक row 5 pin का इसका यूज कंप्यूटर विडियो आउटपुट के लिए होता है |

Dvi

(disital visual interface) इस इंटरफ़ेस का इस्तेमाल वीडियो स्त्रोत से वीडियो डिस्प्ले कंट्रोलर तक डिस्प्ले डिवाइस को कनेक्ट किया जाता है बुनियादी तौर पर इसे बनाने का कारण था अनकंप्रेस्ड वीडियो को मॉनिटर पर देखना |

Hdmi

(high definition multimedia interface)  हम इसे ऑडियो वीडियो इंटरफेस भी कह सकते हैं क्योंकि यह अनकंप्रेस्ड वीडियो को और  कंप्रेस्ड अनकम्प्रेसेड ऑडियो को एक साथ वीडियो कंट्रोलर से मॉनिटर तक पहुंचाता है वर्तमान समय में वीडियो प्रोजेक्टर और टीवी में इसका उपयोग  बहुत ज़्यादा देखने को मिलता है |

प्रिंटर

प्रिंटर यह एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसका उपयोग  डाटा को प्रिंट करने के लिए किया जाता है चाहे डाटा किसी भी फॉर्म में हो जैसे टैक्स नंबर इमेज ब्लैक एंड वाइट और कलर यह एक आउटपुट डिवाइस है |

और इसके द्वारा प्रिंट डाटा को हम हार्ड कॉपी भी कहते हैं जो कि इलेक्ट्रॉनिक डाटा का बहुत ही रूप है जिसे आप छू सकते हैं या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में मौजूद इन्फो या डाटा को किसी भी भौतिक रूप में प्रिंट करने और जिस डिवाइस के द्वारा प्रिंटिंग का कार्य किया जाता है|

उसे हम प्रिंटर कहते हैं प्रिंटर के प्रकार प्रिंटर को कार्य के अनुसार दो भागों में बांटा गया है इंपैक्ट प्रिंटर इस प्रकार के प्रिंटर में  प्रिंट करने के लिए यही लगी हुई रिबन के ऊपर इलेक्ट्रॉनिकलि मार कर या रगड़ कर प्रिंट करने का काम करता है |

जैसे टाइपराइटर में अपने देखा होगा फर्क सिर्फ इतना है की टाइपराइटर में यह काम हाथों से करता है पर प्रिंटर यह काम मशीनों की मदद से इलेक्ट्रॉनिकली करता है इसके अंतर्गत कुछ प्रिंटर है |

  • Dotmatrix printer
  • Line printer
  • नॉन इंपैक्ट प्रिंटर इस तरह के प्रिंटर में प्रिंट करने के लिए प्रिंटिंग कंपोनेंट और पेपर में कोई भी इंपैक्ट प्रिंटर की तरह फिजिकल कांटेक्ट नहीं होता इसमें रिबन का इस्तेमाल नहीं होता बल्कि इंक cartirage का उपयोग होता है इसमें कई छोटे नॉजल होता है जिससे प्रिंट करने के लिए स्याही का स्प्रे करता है |
  • Inkjet printer
  • Laser printer

प्रोजेक्टर

यह भी मॉनिटर की तरह ही कार्य करता है पर यह मॉनिटर से काफी बड़ा होता है यह एक ऑप्टिकल डिवाइस होता है जो कंप्यूटर-computer के साथ कनेक्ट होता है |

और जिसमें से एक तेज रोशनी निकलती है जिसे एक चिकनी सतह पर या एक सफेद पर्दे पर इसको प्रोजेक्ट किया जाता है जिसके जरिए हम पिक्चर को इमेज को यह वीडियो को देख पाते हैं इसका ज्यादातर उपयोग स्कूलों में कॉन्फ्रेंस हॉल में यह मनोरंजन के लिए इसका उपयोग किया जाता है |

प्रोजेक्टर के प्रकार

प्रोजेक्टर को हम 2 प्रकार से देख सकते हैं

इनपुट के प्रकार के अनुसार

1) Real Time projector

  • Camera obscura
  • can cave mirror
  • opaque projector
  • overhead projector
  • document camera

2) still image projector

  • SLight projector
  • Magic Lantern
  • magic mirror

3) moving image projector

  • Movie projector
  • video projector
  • handheld projector
  • virtual retinal display

टेक्नोलॉजी के अनुसार

  • Dlp projector
  • LCD projector
  • CRT projector

प्लॉटर

जिस प्रकार प्रिंटर से छोटे साइज में डाटा या इंफॉर्मेशन की हार्ड कॉपी मिल जाती है उसी प्रकार यदि हमें इंफॉर्मेशन को बड़े पेजों पर चाहिए तो हमें प्लॉटर का उपयोग करना होता है |

जैसे ग्राफ ,ड्राइंग चार्ट ,पोस्टर ,मैप ,बैनर इत्यादि |इसका उपयोग रेखा चित्र बनाने के लिए प्लॉटर एक मल्टी कलर ऑटोमेटिक पेन का इस्तेमाल करता है  इसका अधिकतर उपयोग इंजीनियरिंग क्षेत्र में होता है |

कंप्यूटर के प्रकार

सिग्नल के अनुसार कंप्यूटर के प्रकार:-

सिग्नल के आधार पर कंप्यूटर को तीन भागों में बांटा जा सकता है |

1. एनालॉग कंप्यूटर 2. डिजिटल कंप्यूटर

1.एनालॉग कंप्यूटर

वह कंप्यूटर जो एनालॉग सिग्नल पर कार्य करता है वे सिग्नल जो समय के साथ अपनी स्थिति बदलते हुए आगे बढ़ता है एनालॉग कंप्यूटर कहते हैं

इसे हम ग्राफ के अनुसार समझने का प्रयास करते हैं यदि हम X को टाइम और Y को वोल्टेज मान ले तो समय में आगे बढ़ने पर 0 से p तक वोल्टेज को एक चक्र पूरा करने में वोल्टेज की विभिन्न स्थिति में बदलाव देखने को मिलता है इसे ही हम एनालॉग सिग्नल कहते हैं|

और इसी सिग्नल का उपयोग हम एनालॉग कंप्यूटर में देखते हैं इस प्रकार के कंप्यूटर का उपयोग इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक खोज उपकरणों में ज्यादातर होता है क्योंकि इसकी सटीकता बहुत अधिक अच्छी होती है जैसे स्पीडोमीटर, कांटे वाली घड़ी,सामान्य घड़ी, पेट्रोल पंप  लगी मशीन इंडिकेटर आदि |

Technicial gyan-you can publish all the information related to computer and mobile in my blog: कम्प्यूटर क्या होता है और इसके प्रकार

2.डिजिटल कंप्यूटर

वह कंप्यूटर-computer जो डिजिटल सिग्नल पर कार्य करते हैं डिजिटल सिगनल discontinus प्रकृति का सिग्नल होता है जो समय मैं इस स्थिर यह केवल एक ही प्रकृति का दिखाएगा 0 या 1 |

कंप्यूटर-computer

इसे ग्राफ में समझने का प्रयास करते हैं  समय में आगे बढ़ता है तो वह एक स्पेसिफिक टाइम पर वही वोल्टेज पुनः प्राप्त होता है जो हमें पहले प्राप्त हुआ था|

0 या 1 के रूप में उनके बीच और कोई वोल्टेज नहीं मिलता किस प्रकार के सिग्नल को हम अपने कंप्यूटर सिस्टम में वर्तमान में देखते हैं और हमारे कुछ एनालॉग कंप्यूटर को डिजिटल के रूप में बदलते हुए भी देखते हैं |

और हमारे पास वर्तमान में उपलब्ध है सभी प्रकार के कंप्यूटर का अधार य‍ह डिजिटल सिग्नल ही है डिजिटल वॉच, digital thermometer |

हाइब्रिड कंप्यूटर

वह कंप्यूटर जो एनालॉग और डिजिटल दोनों सिग्नल पर कार्य करता है उसे ही हम हाइब्रिड कंप्यूटर कहते हैं इसका सबसे ज्यादा उपयोग हॉस्पिटल में होता है जैसे- E. C. G.  मशीन में.|

उद्देश्य के अनुसार कंप्यूटर के प्रकार

माइक्रो कंप्यूटर

इसके अंतर्गत आता है जिसका उपयोग हम इंडिविजुअल करते हैं जैसे लैपटॉप डेस्कटॉप मोबाइल टेबलेट आदि यह दूसरे प्रकार के कंप्यूटर से छोटा होता है क्योंकि यह माइक्रोकंप्यूटर होता है |

इसमें लगने वाले माइक्रोप्रोसेसर की वजह से कह सकते हैं 8 बिट माइक्रोप्रोसेसर के साथ पहला माइक्रो कंप्यूटर-computer का निर्माण किया गया था |

इस प्रकार के कंप्यूटर को एक समय में केवल एक ही व्यक्ति द्वारा उपयोग के लिए डिजाइन किया गया था मेनफ्रेम कंप्यूटर और मिनी फ्रेम कंप्यूटर से छोटा होता है |

मिनी कंप्यूटर

मिनी कंप्यूटर-computer एक ऐसा कंप्यूटर है जिसमें एक बड़े कंप्यूटर के अधिकांश विशेषताएं एवं क्षमताएं होती है लेकिन यह आकार में छोटा होता है मिनी कंप्यूटर का मुख्य उपयोग व्यवसाय और वैज्ञानिक अनुप्रयोगों में एवं छोटे एवं मध्यम श्रेणी के सरवर के रूप में उपयोग किया जाता था|

हालांकि अब मिनी कंप्यूटर को सर्वर के रूप में जाने लगे हैं मिनी कंप्यूटर को 1860 के दशक में विकसित किया गया था और इसे सर्वप्रथम I. B. M द्वारा विकसित किया गया था मिनी कंप्यूटर आमतौर पर मध्यम श्रेणी के सर्वर के रूप में उपयोग किया जाता था |

जिसमें मध्यम आकार के सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों के साथ संचालित कर सकते थे जिसमें एक या एक से अधिक प्रोसेसर का उपयोग किया जा सकता था जिसमें हम मल्टिप्रोसेसिंग एवं मल्टीटास्किंग आसानी से कर सकते थे. |

मेनफ्रेम कंप्यूटर

यह एक ऐसा कंप्यूटर-computer है जो आम तौर पर अपने बड़े आकार और उच्च भंडारण क्षमता एवं उच्च प्रोसेसिंग पावर के लिए जाना जाता है यह मुख्य रूप से बड़े संगठनों द्वारा महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों जैसे बैंक, विश्वविद्यालय, बीमा कंपनियां आदि जैसे कामों में उपयोग किया जाता है |

इसमें कुछ विशेषताएं होती है जैसे एक साथ कई ऑपरेटिंग सिस्टम को चलाने की क्षमता होती है मेनफ्रेम बिना किसी व्यवधान के सिस्टम को जोड़ सकता है मेनफ्रेम को बहुत से इनपुट और आउटपुट को संभालने के लिए बनाया जाता है एक मेनफ्रेम दर्जनों या  सैकड़ों सर्वर की जगह ले सकता है

सुपर कंप्यूटर

सुपर कंप्यूटर-computer जैसा कि इस कंप्यूटर के नाम के साथ ही सुपर है इसका अर्थ यह है कि यह किसी तरह से यह स्लो नहीं होगा स्पेस स्टोरेज इसमें बेहतर होगा और परफॉर्मेंस के हिसाब से इसका कोई कंपैरिजन नहीं होगा |

सुपर कंप्यूटर के प्रदर्शन को आमतौर पर मिलियन निर्देश प्रति सेकंड (mips) के बजाय फ्लोटिंग प्वाइंट प्रति सेकंड( flops) में मापा जाता है वर्तमान में ऐसी सुपर कंप्यूटर मौजूद है जो 1017 flops का प्रदर्शन कर सकते हैं ज्यादातर सुपरकंपटर Linux OS पर आधारित होता है

सुपर कंप्यूटर कंप्यूटेशनल विज्ञान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्वांटम यांत्रिकी, मौसम का पूर्वानुमान, जलवायु अनुसंधान, तेल, गैस की खोज, रिएक्टर, क्रिप्टोलॉजी में उपयोग किया जाता है|

प्रत्येक सुपर कंप्यूटर की गति बढ़ाने में प्रारंभिक os कस्टम मेड थे वर्तमान समय में सुपर कंप्यूटर आर्किटेक्चर मालिकाना इन हाउस हो चुका है और os से Linux में रूपांतरित हो गया है हालांकि अधिकांश सुपरकंप्यूटर Linux पर आधारित होता है |

सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर वास्तव में कई कंप्यूटर है जो  समांतर प्रसंस्करण करते हैं आज कई एकेडमिक एवं वैज्ञानिक अनुसंधान फर्म, इंजीनियरिंग कंपनियां, बड़े उद्यम जिन में बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण शक्ति की आवश्यकता होती है सुपर कंप्यूटर का उपयोग करते हैं.|

फंक्शन के अनुसार कंप्यूटर के प्रकार

सर्वर

सर्वर कंप्यूटर-computer का हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर (program or os) दोनों हो सकता है या दोनों से मिलकर बना हो सकता है

सर्वर एक ऐसा सिस्टम है जिसमें इंटरनेट की सहायता से या लोकल एरिया नेटवर्क की सहायता से कई यूज़र (सिस्टम) एक साथ जुड़कर या अलग-अलग भी कार्य कर सकते हैं |

इस आर्किटेक्चर को क्लाइंट सर्वर मॉडल कहा जाता है सर्वर विभिन्न प्रकार की कार्यक्षमता (सेवाएं)प्रदान कर सकता है जैसे यूजर क्लाइंट के बीच डाटा या संसाधन को साझा करना।|

एक व्यक्ति प्रणाली संसाधन  प्रदान कर सकता है और एक ही समय में उसका उपयोग भी कर सकता है यह एक ही समय में सर्वर ओर क्लाइंट दोनों हो सकता है |

वर्क स्टेशन

वर्क स्टेशन सिंगल यूजर के लिए या कंप्यूटर-computer के समूह के लिए डिजाइन किया जाता है जिसकी क्षमता नॉर्मल पीसी से अधिक लेकिन सरवर से कम होता है चाहे स्पीड ,स्टोरेज क्षमता ,ग्राफिक क्वालिटी या कुछ प्रसंस्करण क्षमता होता है|

आमतौर पर लोकल एरिया नेटवर्क से कनेक्टेड हो सकता है जिसे मल्टी यूजर os से रन करवा सकते हैं वर्क स्टेशन को विभिन्न प्रकार के जटिल डाटा जैसे 3D मैकेनिकल डिजाइन , इंजीनियरिंग सिमुलेशन , एनिमेशन और रेंडरिंग इमेज , वैज्ञानिक अनुसंधान , वित्तीय एवं व्यवसायिक अनुप्रयोगों के लिए उपयोग किया जाता है |

उपयोग के अनुसार कंप्यूटर के प्रकार

पब्लिक कंप्यूटर


पब्लिक कंप्यूटर-computer कोई भी कंप्यूटर हो सकता है जिसे आम जनता के द्वारा उपयोग में लाया जाता है इस प्रकार के कंप्यूटर को आमतौर पर डेस्क टॉप मॉडल या किसी प्रकार के कस्टम डिजाइन किए गए कंप्यूटर हो सकते हैं|

जिन्हें विशिष्ट सार्वजनिक सेटिंग में उपलब्ध कराया जाता है जिसे  पुस्तकालयों में स्कूलों में और कॉलेजों में और यहां तक कि बाकी क्षेत्रों और प्रमुख सड़कों के किनारों पर संचालित स्वागत केंद्रों में भी सार्वजनिक कंप्यूटर का मिलना कोई असामान्य बात नहीं है

सर्वजनिक कंप्यूटर  इंटरनेट सेंटर में आम बात है जो किसी को भी जल्दी से वेब खोज करने के लिए ई-मेल की जांच करने के लिए और अन्य बुनियादी कार्यों का प्रबंधन करने के लिए डिजाइन किया गया है |

पब्लिक कंप्यूटर में पर्सनल कंप्यूटर की तरह हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर समान होते हैं हालांकि पब्लिक एक्सेस कंप्यूटर की भूमिका और कार्य पूरी तरह से अलग है एक पब्लिक एक्सेस कंप्यूटर का उपयोग कई अलग-अलग अविश्वसनीय व्यक्तियों द्वारा दिन भर में किया जा सकता है |

पर्सनल कंप्यूटर 

घर एवं कार्यालय में सामान्य उद्देश्य के लिए एवं single-user के लिए इस कंप्यूटर-computer को डिजाइन किया गया था इसे आईबीएम के द्वारा डिजाइन किया गया था |

सबसे पहले जिसे पर्सनल कंप्यूटर का नाम दिया गया था सिंगल डेक्सटॉप लैपटॉप टेबलेट हो सकता है जिसमें सिंगल माइक्रोप्रोसेसर रैम हार्ड डिस्क ड्राइव मदरबोर्ड पावर सप्लाई कीबोर्ड और माउस एवं मॉनिटर के रूप में जाना जाता है |

शेयर्ड कंप्यूटर

हर कोई सुपर कंप्यूटर-computer को अपने पास नहीं रख सकता क्योंकि वह इतना महंगा होता है जिसे आम आदमी को खरीद पाना या उसे अपने पास रख पाना कोई मामूली बात नहीं है |

ऐसे में साझा कंप्यूटिंग सुपर कंप्यूटर का एक आकर्षक विकल्प हो सकता है साझा कंप्यूटिंग उच्च प्रदर्शन वाला कंप्यूटर सिस्टम हो सकता है साझा कंप्यूटर एक तरह से कंप्यूटरों का एक नेटवर्क होता है |

जो कुछ विशिष्ट कार्य को पूरा करने के लिए मनाया जाता है हजारों कंप्यूटरों को भी एक साथ नेटवर्किंग करके साझा कंप्यूटर सिस्टम के द्वारा सुपर कंप्यूटर के प्रसंस्करण शक्ति के बराबर या उससे बेहतर भी बनाया जा सकता है |

कंप्यूटर की महत्वपूर्ण विशेषताएं

  • Memory
  • Accuracy
  • Automation
  • Reliability
  • Versatility
  • Speed
  • Deligence
  • Storage capacity
  • Fast processing power
  • Artificial intelligence
  • reduces paperwork

कंप्यूटर के अनुप्रयोग

  • बैंकिंग
  • कमर्शियल एंटरप्रिसेस
  • एंप्लॉयी रिकॉर्ड
  • अकाउंट receivable
  • stock कंट्रोल
  • इंडस्ट्रीज़
  • रिज़र्वेशन सिस्टम
  • एजुकेशन
  • मेडिकल फील्ड
  • डेस्कटॉप पब्लिशिंग सिस्टम
  • रिकॉर्डिंग स्टूडियो
  • आर्मी

कंप्यूटर की परिभाषा इंग्लिश में

Computer is an electronic device that takes input process it and give output using output device so any device if it fulfills this four conditions what we called computer

कंप्यूटर के फायदे

  • ऊत्पादन क्षमता को बढ़ाता है
  • दुनिया से जोड़ता है
  • अत्यधिक स्टोरेज क्षमता प्रदान करता है
  • डाटा को सुरक्षित और संगठित करके रखता है
  • कंप्यूटर के नुकसान
  • आपके डाटा पर वायरस का खतरा
  • आपके पर्सनल डाटा की चोरी
  • साइबर क्राइम को बढ़ावा
  • कंप्यूटर का भविष्य कैसा होगा

समय के साथ-साथ कंप्यूटर बहुत बदल चुका है और यह लगातार बदलता जा रहा है कंप्यूटर आकार में बहुत छोटा होता जा रहा है परंतु इसकी परफॉर्मेंस बढ़ती जा रही है |

वर्तमान में कंप्यूटर में AI तकनीक का इस्तेमाल करके रोबोट का इस्तेमाल शुरू हो चुका है जिससे भविष्य में मनुष्य के सारे काम रोबोट के द्वारा किया जाएगा चाहे वह प्लेन उड़ाना हो या खाना बनाना हो |

कंप्यूटर इंटरफ़ेस

कंप्यूटर के अंदर सारे कंपोनेंट को एक दूसरे से जोड़ने के लिए और दांतों को एक से एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंचाने के लिए हमें कुछ माध्यम की जरूरत पड़ती है जिसे हम कंप्यूटर की भाषा में बस कहते हैं |

बस के प्रकार

ऐड्रेस बस :- इस वर्ष की आवश्यकता तब होती है जब प्रोसेसर को मेमोरी के लोकेशन को पढ़ना यह लिखना होता है तो यह एड्रेस बस उसके लोकेशन का एड्रेस बताता है और एड्रेस बस की चौड़ाई या निर्धारित करता है कि सिस्टम में कितनी मात्रा में एड्रेस भेजेगा |

डाटा बस :- इसे मेमोरी बस भी कहते हैं जो मुख्य मेमोरी को कंप्यूटर सिस्टम में मेमोरी कंट्रोलर से जोड़ता है मेमोरी कंट्रोलर एक डिजिटल सर्किट है जो कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी में जाने वाले डाटा के श्लोक को मैनेज करता है |

कंट्रोल बस :- जिस प्रकार ऐड्रेस बस रीड एंड राइट डाटा के लिए मेमोरी का एड्रेस रखता है और डाटा बस मेमोरी प्रोसेसर और इनपुट आउटपुट डिवाइस के बीच डाटा पहुंचाता है तो कंट्रोल बस सीपीयू के दूसरे डिवाइस का संपर्क बनाता है |

कंप्यूटर का हमारे जीवन पर प्रभाव

वर्तमान में कंप्यूटर-computer मानव जीवन का अभिन्न अंग हो चुका है जैसे जैसे समय व्यतीत हो रहा है कंप्यूटर की टेक्नोलॉजी में भी विकास हो रहा है जैसे पहले के कंप्यूटर काफी बड़े हुआ करते थे|

जिन्हें अकेले एक इंसान संभालना आसान नहीं था लेकिन पहले के मुकाबले अभी कंप्यूटर का साइज काफी छोटा हो गया है काफी छोटा कहना उचित नहीं होगा क्योंकि हम माइक्रो कंप्यूटर में चले गए आ चुके हैं और हम नैनो कंप्यूटर में भी कदम रख चुके है |

हमने जाना

इस लेख में हमने कंप्यूटर-computer के विषय में जाना |हमने जाना कि कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो यूजर के निर्देशानुसार कार्य को संपादित करता है हमने कंप्यूटर के इतिहास के विषय में संक्षेप में जाना की कैसे पहले के लोग गणना करने के लिए अबेकस का उपयोग करते थे

हमने जाना anti-kai-thera तंत्र को एनालॉग का सबसे पुराना कंप्यूटर माना जाता है | और हमने जाना कि आधुनिक कंप्यूटर का जनक चार्ल्स बैबेज को और क्यों हमें कंप्यूटर की आवश्यकता हुआ था इस पर तो हमने बहुत अच्छे से समझाने का प्रयास किया है |

हमने कंप्यूटर के भागों हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के विषय में संक्षेप में चर्चा किया है जो आपके कंप्यूटर को समझने में सहायता प्रदान करेगा | हमने सीपीयू के विषय में चर्चा किया फर्स्ट जनरेशन से लेकर अब तक सीपीयू के कितने जनरेशन हमारे पास उपलब्ध है |

उनके विषय में भी हमने संक्षेप में समझने का प्रयास किया है सीपीयू के विषय में भी हमने समझने का प्रयास किया है हमने कंप्यूटर की मेमोरी सिस्टम को भी जाना है कि कितने प्रकार की मेमोरी होती है और वे क्या काम करते हैं ? तथा कंप्यूटर में उनकी स्थिति और उनकी क्षमता और उनके परफॉर्मेंस के विषय में भी समझने का प्रयास किया है |

साथ ही साथ इनपुट आउटपुट डिवाइस के विषय में भी जाना है हमने जाना कंप्यूटर के विभिन्न प्रकार के विषय में और उनकी विशेषताओं को भी संक्षिप्त में जाना है हमने इस लेख में आपको कंप्यूटर के इंटरफेस के विषय में भी समझाने का प्रयास किया है |

दोस्तों आशा करता हूं इस लेख को पढ़कर आपकी जानकारी में जरूर  वृद्धि हुआ होगा | यदि कहीं कुछ छूट रहा हो तो हमें कमेंट करके उसे सुधारने का अवसर जरूर प्रदान करें  – इस लेख को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद |

 

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