रैम-Ram के कार्य | रैंम के प्रकार | रैम की भूमिका jankari 24

रैम-Ram के कार्य | रैंम के प्रकार | रैम की भूमिका

रैंडम एक्सेस मेमोरी (RAM) उपकरणों में एक उच्च गति वाला घटक है जो अस्थायी रूप से वर्तमान और भविष्य के लिए आवश्यक सभी सूचनाओं को संग्रहीत करता है।यह एक प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है

जिसे बेतरतीब ढंग से एक्सेस किया जा सकता है, जिसका अर्थ है कि मेमोरी के किसी भी बाइट को पूर्ववर्ती बाइट्स को छुए बिना एक्सेस किया जा सकता है। रैम-Ram सर्वर, पीसी, टैबलेट, स्मार्टफोन, बैकअप ड्राइव और अन्य उपकरणों में पाई जाती है।

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रैम क्या है?

 रैम-Ram क्या है? यह हमारे कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण घटक है यह एक प्राइमरी मेमोरी है एक प्रकार का टेंपरेरी डाटा स्टोरेज है जिसका उपयोग हम कंप्यूटर में करते हैं या किसी और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे मोबाइल, टैबलेट ,लैपटॉप में हम करते हैं जो आमतौर पर मदरबोर्ड के मेमोरी स्लॉट में असेंबल किया जाता है |

यह प्रोसेसर द्वारा तेजी से डाटा को या डाटा के पास पहुंचने के लिए उपयोग किया जाता है क्योंकि यह स्टोरेज के अन्य रूपों की तुलना में पढ़ने और लिखने में बहुत तेज है |

हार्ड डिस्क की तुलना में यह काफी तेज लगभग 30 से 80 गुना है कहने का तात्पर्य यह है कि रेंडम एक्सेस एक काबिलियत है मनचाहे डाटा तक पहुंचने का – एक ही समान समय में या किसी अन्य तत्व की तरह आसानी से और कुशलता से Access किया जा सके चाहे तत्व की संख्या कितनी भी हो और चाहे जितने भी सेट हो |

कंप्यूटर विज्ञान में यह क्रमबद्ध के विपरीत ही होता है जिसके लिए डाटा को  पुनः प्राप्त करने की आवश्यकता होती है जिस क्रम में डाटा स्टोर होता है जिस क्रम मे डाटा को Access देता है जिसे हम रेंडम एक्सेस मेमोरी कहते हैं |

इसे ओर समझे तो डाटा को एक पंक्ति के क्रम में या दो आयाम जैसे एक ही सतह पर row & columns या कई और आयाम में कल्पनिक रूप से संग्रहित किया जाता है हालांकि सभी निर्देशकों को देखते हुए एक प्रोग्राम किसी भी रिकॉर्ड को किसी अन्य रूप में भी जल्दी और आसानी से एक्सेस कर सकता है

चाहे कोई भी इंफो मांगा जाए उसे खोजने के लिए जो कुछ भी आवश्यक है उस इंफॉर्मेशन का पता (address) अर्थात निर्देेशाअंक  जहां पर स्थित है जैसे ईसकी पंक्ति और स्तंभ या चुंबकीय ड्रम पर इसका ट्रैक और रिकॉर्ड नंबर|

इसी प्रक्रिया के दौरान सर्वप्रथम Random Access शब्द का उपयोग हुआ था क्योंकि इस रिकॉर्ड को खोजने में सक्षम होना था चाहे वह किसी भी क्रम में हो हालांकि जल्द ही डायरेक्ट एक्सेस ने random-access की जगह ले ली है क्योंकि इससे सीधे रिकॉर्ड पर करना आसान था चाहे उसकी स्थिति कुछ भी हो हालांकि |

इसकी परिचालन विशेषता यह है कि डिवाइस किसी भी आवश्यक रिकॉर्ड को मांग पर तुरंत एक्सेस कर सकता है इसके विपरीत अनुक्रमिक पहुंच है जो आवश्यक डाटा तक पहुंचने में समय लगाता है अंतर को समझने के लिए कुछ उदाहरण है जैसे :- secuence Access  ,Direct access .

रैम सीक्विंस और रेंडम एक्सेस क्या है ?

A. :-   secuence Access  आवश्यक data से पहले के सभी डाटा को आगे या पीछे करना पड़ता है जैसे टेप कसेट का 2-3 नम्बर आगे गाना सुनने के लिए उसके पीछे सभी गानों को फॉरवर्ड यार रिवर्स करना पड़ता था |What is sequential access with example - IT Release

B. :-  random (Direct) access :- किसी भी मानचाहे पृष्ठ पर तुरंत flip किया जा सकता था जैसे सीडी, डीवीडी ,बिना forwerd reverse किए मनचाहे गाने तक पहुंचा जा सकता है |

कंप्यूटर का मेन मेमोरी है  रैम volatile मेमोरी होता है इलेक्ट्रिक ऑफ होने पर डाटा खो जाता है आईसी चिप के साथ मेटल ऑक्साइड सेमीकंडक्टर का उपयोग किया जाता है

रैम के कार्य

रैम के कार्य को जानने से पहले हमें मेमोरी hierarchy में रैम की स्थिति को जानना होगा कि रैम कहां स्थित होता है

Dive Into Systems

वर्तमान में रैम की केपेसिटी को हम गीगाबाइट में बताते है रैम को हम मेन मेमोरी के रूप में जानते हैं रैम सेकेंडरी मेमोरी और सीपीयू की मेमोरी के बीच का मुख्य घटक होता है और इसके कार्य को हम इस तरह से समझ सकते हैं|

आपको यदि एक मेज पर बैठकर कार्य करना है और आपके कार्य से संबंधित फाइल आपके बुक सेल में रखा है तो जरूरत पड़ने पर आप को उठकर फाइल को लेकर आना पड़ेग लेकिन यदि आप अपने कार्य से संबंधित सभी फाइल को मेज पर लाकर रखेंगे तो आपको कार्य के दौरान बार-बार उठना नहीं पड़ेगा और बैठे-बैठे आपका कार्य हो जाएगा |

ठीक उसी प्रकार जब आप अपना सिस्टम ऑन करते हैं तो booting प्रोसेस के बाद जब आप फाइलों को ओपन करते हैं या इनपुट के माध्यम से कोई info को मांगा जाता है तो रैम अपने स्टोरेज मेमोरी में चेक करता है

यदि वहां पर इंफो ना मिले तो वह सेकेंडरी के पास से इनफो को   लाकर अपने पास store करके रखता है और उसे इंफॉर्मेशन को अपने पास तब तक रखता है जब तक सिस्टम बंद ना हो जाए |

क्योंकि यह वोलेटाइल मेमोरी होता है मतलब पावर कट ऑफ होने पर इसकी मेमोरी लॉस हो जाता है रैम सीपीयू और हार्ड डिस्क के बीच का कार्य करने वाला मुख्य टेंपरेरी स्टोरेज डिवाइस भी कह सकते हैं |

जब भी आप कंप्यूटर में कोई फाइल प्रोग्राम ओपन करते हैं तो सर्वप्रथम  रैम के ब्लॉक पर बने रो एंड कॉलम में डाटा स्टोर होता है मान लो आप कोई गेम खेलना चाहते हैं तो सबसे पहले इस गेम को इंस्टॉल करते हैं

तो सबसे पहले रैम-Ram में इंस्टॉल नहीं होता रैम के सहारे वह आपकी सिस्टम की इंटरनल स्टोरेज या हार्ड डिस्क में इंस्टॉल होता है इंस्टॉल होने के बाद जब उसे खेलने के लिए ओपन करते हैं तो सर्वप्रथम वह रैम में लोड होता है फिर प्रोसेसर के साथ कनेक्ट होकर आपके स्पीड में गेम खेलने में मदद करता हैं |

कंप्यूटर के प्रदर्शन में रैम की भूमिका (The Role of RAM in Computer Performance)

रैम-Ram आपके कंप्यूटर के प्रोसेसर और उसके स्टोरेज डिवाइस के बीच का bridge है। जब आप कोई एप्लिकेशन खोलते हैं या फ़ाइल लोड करते हैं, तो डेटा स्टोरेज ड्राइव से रैम में स्थानांतरित हो जाता है, जिससे सीपीयू इसे तुरंत एक्सेस कर सकता है।

आपके कंप्यूटर में जितनी अधिक रैम होगी, वह इस हाई-स्पीड मेमोरी में उतना अधिक डेटा स्टोर कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप मल्टीटास्किंग आसान हो जाती है और प्रतिक्रिया समय तेज हो जाता है।

रैम क्षमता (RAM Capacity )

RAM क्षमता से तात्पर्य आपके कंप्यूटर में मौजूद मेमोरी की मात्रा से है। इसे आमतौर पर कुछ हाई-एंड सिस्टम में गीगाबाइट्स (जीबी) या टेराबाइट्स (टीबी) में मापा जाता है। RAM क्षमता आपके कंप्यूटर की एक साथ कई कार्यों को संभालने की क्षमता को सीधे प्रभावित करती है। यहां बताया गया है कि यह क्यों मायने रखता है:

मल्टीटास्किंग: पर्याप्त रैम के साथ, आप अपने कंप्यूटर को धीमा किए बिना कई एप्लिकेशन खोल सकते हैं। प्रत्येक खुला एप्लिकेशन रैम का एक हिस्सा घेरता है, और अधिक रैम होने का मतलब है कि आप एक साथ अधिक एप्लिकेशन चला सकते हैं।

 गेमिंग: गेमर्स को उच्च रैम क्षमता से लाभ होता है क्योंकि आधुनिक गेम अक्सर बनावट, ग्राफिक्स और सुचारू गेमप्ले के लिए महत्वपूर्ण मेमोरी की मांग करते हैं।

भविष्य-प्रूफ़िंग( Future-Proofing) : जैसे-जैसे सॉफ़्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम अधिक उन्नत होते जाते हैं, वे अधिक रैम का उपयोग करते हैं। पर्याप्त रैम वाले सिस्टम में निवेश करने से आपके कंप्यूटर का जीवनकाल बढ़ सकता है।

रैम मॉड्यूल को समझना (Understanding RAM Modules)

रैम मॉड्यूल भौतिक घटक होते हैं जिनमें मेमोरी चिप्स होते हैं और आपके कंप्यूटर के मदरबोर्ड से जुड़ते हैं। रैम मॉड्यूल कई प्रकार के होते हैं, लेकिन दो सबसे आम हैं सिंगल इन-लाइन मेमोरी मॉड्यूल (SIMM) और डुअल इन-लाइन मेमोरी मॉड्यूल (DIMM)।

रैम Dimms और simms मे अंतर

“SIMMs” (Single In-Line Memory Modules) और “DIMMs” (Dual In-Line Memory Modules) रैमकंप्यूटर मेमोरी के दो प्रमुख प्रकार हैं और यहाँ पर हम उनके बीच के मुख्य अंतर को प्रस्तुत करते हैं, :

  1. स्थान (Form Factor):
    • SIMMs: SIMMs मेमोरी चिप्स को एक ही पंक्ति में जगह मिलती है, जिसके कारण 32 बिट्स का डेटा पैथ होता है।
    • DIMMs: DIMMs मेमोरी चिप्स को दो पंक्तियों में जगह मिलती है, जिसके कारण 64 बिट्स का डेटा पैथ होता है।
  2. क्षमता (Capacity):
    • SIMMs: SIMMs की क्षमता सीमित होती है और आमतौर पर 1 MB से 256 MB तक की होती है।
    • DIMMs: DIMMs की क्षमता अधिक होती है और आमतौर पर 1 GB से 128 GB तक की होती है।
  3. पूर्वविचार (Backward Compatibility):
    • SIMMs: SIMMs को आमतौर पर पुराने सिस्टमों में प्राचीन रूप से स्थापित करने की आवश्यकता होती है, क्योंकि ये पूर्वविचालन की आवश्यकता होती है।
    • DIMMs: DIMMs को आमतौर पर पूर्वविचालन की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे उन्हें नई सिस्टमों में आसानी से इंस्टॉल किया जा सकता है।
  4. पैकेजिंग (Packaging):
    • SIMMs: SIMMs के चिप्स एक ही पैकेज में जगह मिलते हैं, जिससे इनका आकार बड़ा होता है।
    • DIMMs: DIMMs के चिप्स दो अलग-अलग पैकेजों में जगह मिलते हैं, जिससे इनका आकार छोटा होता है।
  5. उपयोग (Usage):
    • SIMMs: SIMMs अधिकतर पुराने कंप्यूटर्स और सर्वर्स में उपयोग होते हैं, जो पूर्वविचालन को आवश्यक करते हैं।
    • DIMMs: DIMMs नई और मॉडर्न कंप्यूटर्स में उपयोग होते हैं, जो अधिक क्षमता और प्रदर्शन की आवश्यकता होती है।

इन विभिन्न विशेषताओं के बावजूद, SIMMs पुराने सिस्टमों के साथ उपयोग के लिए उपयुक्त हो सकते हैं, लेकिन ये प्रदर्शन में सीमित होते हैं। DIMMs नई सिस्टमों के साथ उपयोग के लिए बेहतर होते हैं और उच्च स्थानीयता और प्रदर्शन के साथ आते हैं।

रैम काम कैसे करता है?

रैम-Ram काम कैसे करता है इसके लिए हमें रैम की बनावट और उसके लगने वाले कंपोनेंट के बारे में समझना होगा जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कंप्यूटर बायनरी बीट या कोर्ट पर पर काम करता है इसके लिए हम एक स्विच को लेकर समझ सकते हैं

जब हम स्विच के साथ कोई बल्ब कनेक्ट करते हैं और जब स्विच को ऑन करते हैं तो बल्ब जलता है और इसे हम 1 मान लेते हैं और स्विच ऑफ को हम 0 माल लेते हैं

जैसा कि हम जानते हैं एक बाइट में 8 बिट होता है इसी को ध्यान में रखकर 8 बिट के लिए हम 8 स्विच और 8 बल्ब का उपयोग करते हैं और जो बल्ब जलेगा उसे राइट और जो off रहेगा उसे रीड डाटा मान कर चल सकते हैंइसी के आधार पर यह छोटा सा रैम डाटा को राइट एंड रीड करता है

और क्योंकि यह स्विच एक सीरीज में एक दूसरे के साथ कनेक्ट होता है यदि पावर सप्लाई कट होता है तो डाटा का लॉस हो जाता हैकंप्यूटर में इस पद्धति का उपयोग करने के लिए ट्रांजिस्टर एवं केपीसीटर का उपयोग करके रैम का निर्माण किया जाता है

रैम चैनल को समझना (Understanding RAM Channels)

रैम-Ram चैनल उन मार्गों को संदर्भित करते हैं जिनके माध्यम से डेटा सीपीयू (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) और मेमोरी मॉड्यूल के बीच यात्रा करता है। किसी सिस्टम में RAM चैनलों की संख्या यह निर्धारित करती है कि डेटा को मेमोरी से कितनी कुशलता से पढ़ा और लिखा जा सकता है। सबसे आम रैम चैनल कॉन्फ़िगरेशन हैं:

  • सिंगल-चैनल (1-चैनल )
  • डुअल-चैनल (2-चैनल)
  • ट्रिपल-चैनल (3-चैनल)
  • क्वाड-चैनल (4-चैनल):

रैम चैनल्स का महत्व

 रैम-Ram चैनलों की संख्या सीधे मेमोरी बैंडविड्थ को प्रभावित करती है, जो गेमिंग, सामग्री निर्माण और वैज्ञानिक कंप्यूटिंग जैसे मेमोरी-गहन कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है। यहां बताया गया है कि रैम चैनल क्यों मायने रखते हैं:

  • बढ़ी हुई बैंडविड्थ (Increased Bandwidth)
  • अनुकूलित गेमिंग (Optimized Gaming )
  • सामग्री निर्माण (Content Creation)
  • वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग अनुप्रयोग (Scientific and Engineering Applications)

रैम चैनल की जाँच करना

अपने सिस्टम के रैम-Ram चैनल कॉन्फ़िगरेशन को निर्धारित करने के लिए, आप यह कर सकते हैं:

  • निर्माता की वेबसाइट पर अपने मदरबोर्ड के मैनुअल या विशिष्टताओं को देखें।
  • अपने सिस्टम की BIOS या UEFI सेटिंग्स की जाँच करें, जहाँ RAM चैनल कॉन्फ़िगरेशन अक्सर प्रदर्शित होता है।
  • डायग्नोस्टिक टूल या सॉफ़्टवेयर का उपयोग करें जो रैम चैनल सहित आपके सिस्टम के हार्डवेयर के बारे में जानकारी प्रदान कर सके।

ईसीसी रैम और गैर-ईसीसी रैम क्या है ?

ईसीसी रैम (ECC RAM)

ईसीसी (Error-Correcting Code) रैम, या एरर-करेक्टिंग कोड रैम, एक प्रकार की मेमोरी है जिसमें सिंगल-बिट मेमोरी त्रुटियों का पता लगाने और उन्हें ठीक करने के लिए त्रुटि-सुधार कोड सर्किटरी शामिल होती है। इसका उपयोग अक्सर मिशन-महत्वपूर्ण प्रणालियों में किया जाता है जहां डेटा अखंडता सर्वोपरि होती है

गैर-ईसीसी रैम (NON-ECC RAM)

गैर-ईसीसी (Error-Correcting Code) रैम, या गैर-त्रुटि-सुधार कोड रैम, अधिकांश उपभोक्ता और गेमिंग पीसी में उपयोग की जाने वाली मानक प्रकार की मेमोरी है। इसमें ईसीसी रैम की त्रुटि-जाँच और सुधार क्षमताओं का अभाव है।

रैम की परिभाषा

कंप्यूटर की भाषा मे रैम-Ram एक हार्डवेयर डिवाइस है जो o s , एप्लीकेशन प्रोग्राम, प्रोसेसर और हार्ड डिस्क को कनेक्ट करने का एक मध्यम है जिस्की स्टोरेज छमता कम होता है और वह अस्थायी होता है |

रैम मेमोरी सेल

रैम-Ram मेमोरी सेल एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट है जो बाइनरी जानकारी के एक बिट को स्टोर करता है और इसे लॉजिक 1 (हाई वोल्टेज लेवल) को स्टोर करने के लिए और लॉजिक 0 (लो वोल्टेज लेवल) को स्टोर करने के लिए रीसेट करना चाहिए |

इसका मान तब तक बनाए रखा/संग्रहीत किया जाता है जब तक कि इसे सेट/रीसेट प्रक्रिया द्वारा परिवर्तित नहीं किया जाता है।

रैम एड्रेसिंग

आमतौर पर रैम-Ram मे ऐड्रेस लाइनA0…. An का एक सेट होता है जिसमें प्रत्येक बिट को एक लाइनों में समायोजित रखते हैं जिससे एक मेमोरी सेल एक्टिवेट होता है

इस मेमोरी सेल को सिलेक्ट करने के लिए रैम मल्टीप्लेक्सिंग और डिमल्टीप्लेक्सिंग सर्किट का उपयोग करता है इसके लिए मेमोरी को रीडेबल और राइटेबल होना चाहिए

आमतौर पर के मेमोरी सेल एक ही एड्रेस को शेयर करते हैं उदाहरण के लिए एक 4 bit रैम-Ram में प्रत्येक एड्रेस के लिए 4 मेमोरी सेल होता है

अक्सर मेमोरी की bit साइज प्रोसेसर की बिट साइज से अलग होता है जैसे कि 32 बिट प्रोसेसर के लिए 8, 4 बिट ram चीफ की आवश्यकता होगा

इस ऐड्रेसिंग के कारण ही ram को एक मेमोरी होने पर 2 ram के रूप में काम करवा सकते हैं 1) मेन मेमोरी. 2) वर्चुअल मेमोरी के रूप में

रैम का संक्षिप्त इतिहास

मेटल ऑक्साइड सेमीकंडक्टर का उपयोग 1965 में हुआ जब आईबीएम ने 360 / 9 5 के लिए sram और tosiba ने toscal bc- 1411 इलेक्ट्रॉनिक केलकुलेटर के लिए dram मेमोरी सेल का उपयोग किया था |

दोनों दू ध्रुविय ट्रांजिस्टर पर आधारित था mos ट्रांजिस्टर पर आधारित व्यवसायिक mos मेमोरी 1960 के दशक के अंत में विकसित किया गया था| तभी से यह सभी व्यवसायिक सेमीकंडक्टर मेमोरी का आधार है |

रैम के प्रकार (Types of Ram)

a) sram, b) dram

a) sram,

S रैम-Ram (Static Random Access मेमोरी)-memory स्टैटिक शब्द यह दर्शाता है कि जब तक बिजली की आपूर्ति की जा रही है तब तक मेमोरी अपनी सामग्री को या अपने डेटा को बरकरार रखता है |

हालांकि अस्थिर प्रकृति के कारण बिजली बंद होने पर डाटा खो जाता है sram चिप्स 6ट्रांजिस्टर के मैट्रिक्स का उपयोग करते हैं और कोई capeciter का उपयोग नही करते है

ट्रांजिस्टर को रिसाव को रोकने के लिए की एक्सट्रा पावर की आवश्यकता नहीं होती इसलिए sram को नियमित रूप से रिफ्रेश करने की आवश्यकता नहीं होती है |

S Ram समान मात्रा में स्टोरेज स्पेस के लिए dram की तुलना में अधिक chips का उपयोग करता है जिसकी निर्माण लागत अधिक हो जाती है  sram का उपयोग कैश मेमोरी के रूप में किया जाता है |

और इसकी स्पीड बहुत ज्यादा होती है एक प्रकार की रेंडम एक्सेस मेमोरी है जो प्रत्येक बीट को स्टोर करने के लिए लैचिंग सर्किट री (flip flop) का उपयोग करती है यह volatile मेमोरी है |

b) dram

D Ram ( Dynamic Random Access Memory) एक सेमीकंडक्टर मेमोरी है यह एक ऐसा रैम-Ram जो प्रत्येक बिट डाटा को मेमोरी-memory सेल में स्टोर करती है जिससे एक छोटा कैपेसिटर और एक ट्रांजिस्टर होता है दोनों आमतौर पर मेटल ऑक्साइड सेमीकंडक्टर (MOS) का बना होता है |

कैपेसिटर को या तो चार्ज या डिस्चार्ज किया जा सकता है इसे हम कंप्यूटर की भाषा में 2 स्टेट कह देते हैं जोकि जीरो और एक की प्रतिनिधित्व करते हैं कैपेसिटर पर विद्युत चार्ज धीरे-धीरे लीक हो जाता है |

इसलिए बिना किसी हस्तक्षेप के Dram पर डाटा जल्द ही खो जाता है इसी रोकने के लिए Dram को बार-बार रिफ्रेश करने की आवश्यकता होती है जो समय समय पर capeciter में डाटा को फिर से लिखता है और उनके मूल चार्ज पर पुनः स्थापित करता है |

रैम-Ram की विशेषताएं

प्राइमरी मेमोरी है

  • वोलेटाइल मेमोरी है
  • सेकेंडरी मेमोरी की अपेक्षा तेज है
  • स्टोर करने की क्षमता कम होती है
  • कंप्यूटर की वर्किंग मेमोरी कहा जाता है
  • रैम-Ram के बिना कंप्यूटर स्टार्ट नहीं हो सकता
  • डाटा को random Access किया जाता है

स्टेटिक रैम और डायनेमिक रैम के बीच अंतर

S-Ram

जानकारी को स्टोर करने के लिए ट्रांजिस्टर का उपयोग किया जाता है।

कैपेसिटर का उपयोग नहीं किया जाता है इसलिए किसी रिफ्रेशिंग की आवश्यकता नहीं होती है की तुलना में एसआरएएम तेज है।

dram की तुलना में sram तेज है।

ये महंगे हैं।

sram कम घनत्व वाले उपकरण हैं।

इनका उपयोग कैश मेमोरी में किया जाता है।

sram को निरंतर बिजली की आपूर्ति की आवश्यकता होती है, लेकिन यह कम बिजली की खपत करता है।

sram की स्टोरेज क्षमता 1MB से 16MB तक है।

sram ऑन-चिप मेमोरी के रूप में होता है।

sram छोटे आकार का होता है।

इस प्रकार की रैम-Ram स्विच के माध्यम से करंट की दिशा बदलने के सिद्धांत पर काम करती है।

D-Ram

dram में डेटा स्टोर करने के लिए Capacitors का उपयोग किया जाता है

जानकारी को लंबे समय तक संग्रहीत करने के लिए, संधारित्र की सामग्री को समय-समय पर refresh करने की आवश्यकता होती है।

dram धीमी पहुँच गति प्रदान करता है।

ये सस्ते होते हैं।

dram उच्च घनत्व वाले उपकरण हैं।

इनका उपयोग मुख्य स्मृतियों में किया जाता है।

dram का एक्सेस टाइम अधिक होता है। यह sram से धीमा है।

sram की तुलना में dramकी लागत कम है।

dram को अधिक बिजली की खपत की आवश्यकता होती है क्योंकि संधारित्र में जानकारी संग्रहीत होती है।

dram की स्टोरेज क्षमता 1 जीबी से 16 जीबी है।

dram में ऑफ-चिप मेमोरी की विशेषताएं हैं।

dram बड़ी स्टोरेज क्षमता में उपलब्ध है।

इस प्रकार की ram चार्ज को होल्ड करने का काम करती है।

पीसी रैम और फ़ोन रैंम के बीच अंतर 

ज्यादातर mobile processors में LPDDR इस्तमाल होता है वहीँ computers में PCDDR का इस्तमाल होता है.|

LPDDR ( Low power Double data synchronous RAM.)

PCDDR ( standard Double data synchronous RAM.)

ये दोनों ही रैम-Ram एक दुसरे से power में ही अलग होते हैं. Mobile RAM को ज्यादा power save करने के लिए design किया गया होता है, वहीँ PC RAM को performance बढ़ाने के लिए design किया गया होता है.|

ज्यादातर mobile processors को ARM architecture का इस्तमाल कर design किया गया होता है. वहीँ PC RAM को Intels x86 architecture के हिसाब से बनाया गया होता है.|

रैम सकारात्मक प्रभाव

  1. प्रदर्शन (Performance):- रैम-Ram कंप्यूटर के प्रदर्शन को बढ़ावा देता है।
  2. कुशलता (Efficiency):- RAM डेटा पहुँचने की कुशलता में सुधार करता है।
  3. गति (Speed): -RAM तेज डेटा प्रसंस्करण में मदद करता है।
  4. अपग्रेड (Upgrading): – RAM को अपग्रेड करने से सिस्टम प्रदर्शन में सुधार हो सकता है।
  5. बिना रुकावट (Seamless):- RAM बिना रुकावट के बहु-कार्य निष्पादन को संभव बनाता है।
  6. सुधारना (Enhancement): – RAM कुल कंप्यूटिंग अनुभव को सुधारता है।

रैम नकारात्मक प्रभाव

  1. क्रैश (Crash): अपर्याप्त रैम-Ram सिस्टम को क्रैश कर सकता है।
  2. धीमा हो जाना (Slowdown): अपर्याप्त RAM से सिस्टम धीमा हो सकता है।
  3. बॉटलनेक (Bottleneck): अपर्याप्त RAM प्रदर्शन में बॉटलनेक उत्पन्न कर सकता है।
  4. अनुकूलनानुरूपता (Incompatibility): RAM की अनुकूलनानुरूपता समस्याओं का कारण हो सकती है।
  5. सीमा (Limitation): RAM की सीमाएँ बहु-कार्य करने में रोक सकती हैं।
  6. पुराना (Obsolete): – पुराना RAM आधुनिक सिस्टमों के साथ अनुकूल नहीं हो सकता।

रैम की गति और समय (RAM Speed and Timings)

capicity के अलावा, रैम की गति और समय भी प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। रैम की गति मेगाहर्ट्ज़ (मेगाहर्ट्ज) में मापी जाती है और यह इंगित करती है कि डेटा को मेमोरी से कितनी तेजी से पढ़ा या लिखा जा सकता है। कम विलंबता (सीएएस विलंबता या सीएल में मापी गई) आम तौर पर बेहतर होती है।

रैम ओवरक्लॉकिंग

रैम ओवरक्लॉकिंग कंप्यूटर की घड़ी की गति या आवृत्ति, जैसे सीपीयू या रैंडम एक्सेस मेमोरी, को निर्माता द्वारा निर्दिष्ट सीमा से अधिक बढ़ाने की प्रक्रिया है। यह प्रदर्शन और प्रसंस्करण गति को बढ़ाने के लिए किया जाता है, लेकिन यह कुछ जोखिमों के साथ आता है|

जैसे कि गर्मी उत्पादन में वृद्धि और हार्डवेयर क्षति अगर इसे सही ढंग से नहीं किया जाता है। रैम ओवरक्लॉकिंग क्या है? RAM वह गति है जिस पर RAM मॉड्यूल संचालित होता है। इसे मेगाहर्ट्ज या गीगाहर्ट्ज में मापा जा सकता है।

रैम की डिफ़ॉल्ट गति आमतौर पर निर्माता द्वारा उत्पाद विनिर्देशों में निर्दिष्ट की जाती है। रैम को ओवरक्लॉक करके, आप सिस्टम रिस्पॉन्सिबिलिटी में सुधार कर सकते हैं और मेमोरी गहन कार्यों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं|

उदाहरण: डेटा ट्रांसफर दरों में सुधार के लिए 3200 मेगाहर्ट्ज रैम मॉड्यूल को 3600 मेगाहर्ट्ज तक बढ़ाना। बेहतर मल्टीटास्किंग और तेज़ एप्लिकेशन लोडिंग के लिए 2666 मेगाहर्ट्ज रैम मॉड्यूल को 3000 मेगाहर्ट्ज पर ओवरक्लॉक करना।

रैम को अपग्रेड करना (Upgrading RAM)

यदि आपका कंप्यूटर सुस्त लगता है, तो प्रदर्शन को बढ़ावा देने के लिए रैम-Ram को अपग्रेड करना एक लागत प्रभावी तरीका हो सकता है। अधिकांश डेस्कटॉप और कुछ लैपटॉप कंप्यूटर रैम अपग्रेड की अनुमति देते हैं।

अनुकूलता और इंस्टॉलेशन निर्देशों के लिए अपने कंप्यूटर के मैनुअल या निर्माता की वेबसाइट से परामर्श लें।

हमने जाना 

मुझे विश्वास है आप लोगों को मेरा यह लेख रैम-Ram क्या है जरूर पसंद आया होगा इस लेख में हमने रैम को विस्तार से समझाया है  हमने जाना है क्यों इसे रैंडम एक्सेस कहते हैं तथा हमने यह भी समझने का प्रयास किया है कि रैम के कार्य क्या है और कैसे कार्य करता है |

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